रिम झिम रिम झिम मेगा बरसे गीत सुनाये कोयालियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रिम झिम रिम झिम मेगा बरसे गीत सुनाये कोयालियाँ,

जुक देखन आया अम्बर नाचे मोरा सांवरियां,

रिम झिम रिम झिम मेगा बरसे गीत सुनाये कोयालियाँ,

माटी कंचन बनती जाए,

मोहन चरण जो लागे,

नन्द वन की पाती भक्ति नूपुर बन शन बाजे,

घणां घन ताल भजाये उमड़ के आये बादरियाँ,

जुक देखन आया अम्बर नाचे मोरा सांवरियां,

रिम झिम रिम झिम मेगा बरसे गीत सुनाये कोयालियाँ,

राग ऋतू ने ऐसा गाया नव का सुन के विदंग,

तीनो लोक सिमट यमुना तट देखत गिरिधर रंग,

वरखा के मोती पग चूमे वन वन जाये पैजनियां,

जुक देखन आया अम्बर नाचे मोरा सांवरियां,

रिम झिम रिम झिम मेगा बरसे गीत सुनाये कोयालियाँ,

महा पर्व रचाया भव में लीला अजब दिखाई,

गोदन मोर पपीहे कोयल नाचे संग कन्हाई,

ऐसी अध्भुत तान सुनाये मुरलीधर की बांसुरियां,

जुक देखन आया अम्बर नाचे मोरा सांवरियां,

रिम झिम रिम झिम मेगा बरसे गीत सुनाये कोयालियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।