बजरंग के आते आते कही भोर हो न जाये रे

लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

बजरंग के आते आते कही भोर हो न जाये रे,

ये राम सोचते हैं, श्री राम सोचते हैं ।

क्या भोर होते होते बजरंग आ सकेंगे,

लक्ष्मण को नया जीवन फिर से दिला सकेंगे ।

कही सास की ये डोरी कमजोर हो न जाये रे,

ये राम सोचते हैं, श्री राम सोचते हैं ॥

कैसे कहूँगा जा के मारा गया है लक्ष्मण,

तज देगी प्राण सुन के माता सुमित्रा फ़ौरन ।

कहीं यह कलंक मुझसे इक और हो ना जाए रे,

ये राम सोचते हैं, श्री राम सोचते हैं ॥

लक्ष्मण बिना है टूटा यह दांया हाथ मेरा,

कुछ सूझता नहीं है चारो तरफ अँधेरा ।

लंका में कहीं घर घर ये शोर हो ना जाये रे

ये राम सोचते हैं, श्री राम सोचते हैं ॥

वर्ना अटल है ‘शर्मा’ मेरी बात ना टलेगी,

लक्ष्मण के साथ मेरी ‘लख्खा’ चिता जलेगी ।

मैं सोचता तो कुछ हूँ, कुछ और हो न जाये रे,

ये राम सोचते हैं, श्री राम सोचते हैं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।