करो नजरे कर्म हे साई तेरे दर पे दीवाना आया है

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॥ पावन पाठ ॥

करो नजरे कर्म हे साई तेरे दर पे दीवाना आया है,

दर दर से ठोकर खा के तेरे दर पे ठिकाना पाया है,

करो नजरे कर्म हे साई तेरे दर पे दीवाना आया है,

मारा है तकदीर ने ऐसा मुझको कही का छोड़ा न ,

छोड़ के मुझको दौड़े सारे साथ मेरे कोई दौड़ा न ,

अँधेरे में साथ न देता मेरा खुदा का साया है,

करो नजरे कर्म हे साई तेरे दर पे दीवाना आया है,

सच्चा नहीं कोई साथी जग में कर्ज मंग है मतलब के,

अपना बना कर गावह लगा ते शातिर है ये बड़े गजब के,

अभी तकता सा लगता है जो जख्म पुराना खाया है,

करो नजरे कर्म हे साई तेरे दर पे दीवाना आया है,

क्या कहु मैं अपनों की ये वक़्त पे रंग दिखाते है,

वक़्त पड़े जो किसी के ऊपर वक़्त पे काम ना आते है,

दस्तूर निराला दुनिया का मेरे मन को जरा न भाया है,

करो नजरे कर्म हे साई तेरे दर पे दीवाना आया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।