कहाँ छुपे हो कन्हैया

अजय तिवारी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

क्यों तूँ मीठी मीठी बांसुरी वजाए वार वार,

कहाँ छुपे हो कन्हैया आजा सामने इक वार ।

क्यों तो नज़रे मिलाई तो से नैन किए चार,

कहाँ छुपे हो कन्हैया आजा सामने इक वार ॥

सांसो के तार पर मन की वीणा बोले,

लगी है लग्न बस तेरी काहे तूँ न बोले ।

तुझे ढूँढू गली गली और सब द्वार द्वार,

कहाँ छुपे हो कन्हैया आजा सामने इक वार ॥

जाने कैसा जादू तेरी मुरली में मोहन,

सुध विसरा दी श्याम भूल गई तन मन ।

मेरा करता है मन बस तेरी पुकार,

कहाँ छुपे हो कन्हैया आजा सामने इक वार ॥

तेरी वो वाह की चितवन कैसे भुलाएं श्याम,

न जाने कया देखा तुझमे झलक को तरस गए श्याम ।

दे दे तेरी जो खबरिया उसकी जाऊं बलिहार,

कहाँ छुपे हो कन्हैया आजा सामने इक वार ॥

तान सुना के श्याम सुध विसरा दी,

तन मन में मेरे श्याम आग लगा दी ।

तुझे कैसे समझाऊं कभी किया नहीं प्यार,

कहाँ छुपे हो कन्हैया आजा सामने इक वार ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।