बाबा की ज्योति है जब है जगाई

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा की ज्योति है जब है जगाई मुझको लगा है की मैं शिरडी में आई,

जब भी किसी ने कहा ॐ साई मुझको लगा के मैं शिरडी में आई,

सुख भी उसी के दुःख भी उसी के कट ते ही रहते है पल भी उसकी के,

पर जब भी ख़ुशी कोई पाई मुझको लगा के मैं शिरडी में आई,

बाबा की ज्योति है जब है जगाई मुझको लगा है की मैं शिरडी में आई,

तन्हा कभी न पाया है खुद को मन के झरोखे से देखा है उसको,

गर्दन जरा जब भी अपनी जुकाई मुझको लगा के मैं शिरडी में आई,

बाबा की ज्योति है जब है जगाई मुझको लगा है की मैं शिरडी में आई,

भक्तो ने जब भी भजन कोई गाया सच मुच् वही मैंने बाबा को पाया,

साहिल ने जैकार जब भी लगाई मुझको लगा के मैं शिरडी में आई,

बाबा की ज्योति है जब है जगाई मुझको लगा है की मैं शिरडी में आई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।