चली आई रे भवानी माई पवन पवन पुरवाइयाँ रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चली आई रे भवानी माई पवन पवन पुरवाइयाँ रे,

पूर्व दिशा हरलाइ माँ बदरियाँ चुनर झलक ता थइयाँ रे,

चली आई रे भवानी माई पवन पवन पुरवाइयाँ रे,

अमुआ भी बोलत काली रे कोयालियाँ,

मंदिरी पे नाचत पिराइयाँ रे,

चली आई रे भवानी माई पवन पवन पुरवाइयाँ रे,

बड़े गोकुल राधा बनी माँ भवानी,

बंसी बजाए जो कन्हियान रे,

चली आई रे भवानी माई पवन पवन पुरवाइयाँ रे,

सुमिर सुमिर यश गाये माँ मनोहर,

दुर्गा माँ लाइ ओ बलैयां रे,

चली आई रे भवानी माई पवन पवन पुरवाइयाँ रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।