दर्शन देख जीवां गुरु तेरा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा - २

पूरण करम होये प्रभु मेरा - २

एह बिनंती सुन प्रभु मेरे - २

देहे नाम कर अपने चेरे - २

अपनी शरण राख प्रभु दाते - २

गुर-प्रसाद किनै बिरले जाते - २

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा - २

सुनो बिनो प्रभ मेरे मीता - २

चरण कमल बसे मेरे चीता - २

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा - २

नानक एक करे अरदास - २

बिसर नाही पूरण गुण तास - 2

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा - २

दर्शन देख जीवां गुरु तेरा - २

पूरण करम होये प्रभु मेरा - २

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।