जा रे कान्हा जा रे जा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जा रे कान्हा जा रे जा, जा रे जा, जा रे कान्हा जा रे जा

अब के मोहन सुध ना हरुंगी,

बृन्दाबन जा बंसी बजा !!

तुम से भली तो तुमरी छबी है,

जुग जुग से जो मन में बसी है

उसके अधर पर भी बन्सी है,

वो कान्हा मेरा, जा तू जा .. ||

तुम बिन अब ना मैं तडपूंगी,

तुमरे दरस को ना तरसूंगी

बिनती करुँगी ना पैय्या पडूँगी,

जित जाना उत जा, जा तू जा .. ||

गीत : ग्वाला

संगीत : अरुण सराफ

अल्बम : रंग दे ओ श्याम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।