सखी ऋ मेरो बिगड़ गयो भरतार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सखी ऋ मेरो बिगड़ गयो भरतार,

भांग मोसे रोज़ घुटावे से ,

रोज घुटावे से ,

सखी ऋ मेरो बिगड़ गयो भरतार,

भांग मोसे रोज़ घुटावे से ,

कच्ची कच्ची भांग मंगावे दूध और चीनी मिलावे,

पी के रेहवे टली फिर भी नहीं बतावे से,

सखी ऋ मेरो बिगड़ गयो भरतार,

भांग मोसे रोज़ घुटावे से ,

सावन के मेले में भगतो के संग धूम मचावे,

पी के भंगियाँ आप साथ में सबे पिलावे से,

सखी ऋ मेरो बिगड़ गयो भरतार,

भांग मोसे रोज़ घुटावे से ,

रात दिना पी के आवे तन पे भस्म रमावे,

करे ताण्डव करे सखी दुनिया गबरावे से ,

सखी ऋ मेरो बिगड़ गयो भरतार,

भांग मोसे रोज़ घुटावे से ,

भोला मने सतावे रूठ के पर्वत यो चढ़ जावे,

विक्रम दीपा इसे मनावे को न माने ये,

सखी ऋ मेरो बिगड़ गयो भरतार,

भांग मोसे रोज़ घुटावे से ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।