देखो चामुंडा नाच रही ताल में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नेत्र अंगनी पुंज ज्वाला कर रही तांडव तरह,

त्राहि त्राहि गान होके पाल में ,

देखो चामुंडा नाच रही ताल में,

खपर तिरशूल रखे बेर भी विगुल रखे मस्तक पे चंदरमाँ है,

नागिन से केश रखे लटक रही गले मुंड मॉल में,

देखो चामुंडा नाच रही ताल में,

खडकी से मार रही पैरो से रोंद रही जो जो काली मेगन दमानी सी क्रोध रही,

जीब लप लपाती फिरे पाल में,

देखो चामुंडा नाच रही ताल में,

विघ्नों से काली ने धरती को काट दियां,

चुन चुन कर इक इक शात्रू को काट दियां,

लौट रहे शंकर बी पाँव में ,

देखो चामुंडा नाच रही ताल में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।