मुझे लेके चलो न साई जी के मेले में

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॥ पावन पाठ ॥

नीम की ठंडी छाओ में साई जी के गांव में,

भीड़ है भारी खो न जाओ डर लागे है अकेले में,

मुझे लेके चलो न साई जी के मेले में,

चाहे गद्दी घोडा लाओ या आके ले जाओ ठेले में,

मुझे लेके चलो न साई जी के मेले में,

साई नगरियां बड़ी सुहानी जिस की दुनिया है रे दीवानी ,

साँचा दर है साँचा नाम है कहते है ग्यानी ध्यानी,

पावन माटी माथ लगाओ जीवन अपना धन्य बनाओ,

कही गाडी छूट न जाए माये के झमेले में ,

मुझे लेके चलो न साई जी के मेले में,

कहते है सब साई के दर से जाता नहीं कोई खाली,

जिसने पुकारा सच्चे मन से साई ने बात न टाली

रेहमत की बरसात है होती पानी से जलती है ज्योति,

कही मैं खो न जाऊ दुनिया के खेमे में,

मुझे लेके चलो न साई जी के मेले में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।