देवो में देव है निराला अपना है सेठ गणपति लाला

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

शिव शंकर सुख देव गणपति देवो में बलकारी,

सब से पहले तेरा सुमिरन करती दुनिया सारी,

देवो में देव है निराला अपना है सेठ गणपति लाला,

रनत भवन दरबार लगा बैठा है सरकार वहां,

सीधी विनायक सा जग में और कोई दातार कहा,

सारी दुनिया का रखवाला अपना है सेठ गणपति लाला,

देवो में देव है निराला अपना है सेठ गणपति लाला,

चार बजा धारी है मूसे की असवारी है,

लड्डूवन का तुझे भोग लगे भगतो का हितकारी है,

सारे विग्नो को इस ने ताला ,अपना है सेठ गणपति लाला,

देवो में देव है निराला अपना है सेठ गणपति लाला,

धुंद धुलाला सूंड सुंडाला मस्तक मोटा कान है,

देवो के सिर मोर गजानन ऊंची तेरी शान है,

सब की झोली में इस ने डाला,अपना है सेठ गणपति लाला,

देवो में देव है निराला अपना है सेठ गणपति लाला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।