मैया कुछ बोल रही

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मैया जी है न्यारी लागे लाखो में प्यारी,

सारे जग में तो मैया दोल रही,

मैया मैया मैया मियां मियां मेरी मैया,

ऐसा लगे जैसे मैया कुछ बोल रही,

मेरी मैया जी की मूरत बोल रही,

गाओ गाओ हर शहर शहर में मैया मेरी पूज रही,

दुर्गा दुर्गा जय माँ दुर्गा आंबे रानी गूंज रही,

बाजे ढोल शहनाई द्वारे मैया जी आई ,

माँ की ज्योति दिल में जलती रही,

मैया मैया मैया मियां मियां मेरी मैया,

ऐसा लगे जैसे मैया कुछ बोल रही,

मेरी मैया जी की मूरत बोल रही,

चम चम चमक रही मेरी मैया चंदा भी तो फीका है,

माँ के दिव्ये सवरोपो से तो सूरज जग में दीखता है,

माता रानी का नजारा सब झूमे जग सारा,

गावे विजय गीत लिखात रही,

मैया मैया मैया मियां मियां मेरी मैया,

ऐसा लगे जैसे मैया कुछ बोल रही,

मेरी मैया जी की मूरत बोल रही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।