लाल चोला है चुनरी है तारो जड़ी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लाल चोला है चुनरी है तारो जड़ी,

मंदिर में बैठी माँ लागे प्यारे बड़ी,

लाल चोला है चुनरी है तारो जड़ी,

बह्रमा विष्णु करे माँ तेरी वंदना,

शिव अधूरे है माँ तेरी शक्ति बिना,

बीड़ देवो की माँ तेरे दर पे खड़ी

मंदिर में बैठी माँ लागे प्यारे बड़ी,

चरणों की चाकरी वीर हनुमत करे ,

ध्यान तेरा ही माँ भेरो धरे,

ऐसी माँ को मना लो घडी दो घडी,

मंदिर में बैठी माँ लागे प्यारे बड़ी,

माँ को दे प्यार माँ खुश तेरे प्यार में,

देती ममता तुझे मैया उपहार में,

अपने बचो पे माँ है दयालु बड़ी,

मंदिर में बैठी माँ लागे प्यारे बड़ी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।