तुम्हरे द्वारे आन पड़ी हु शिरडी के महाराज

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॥ पावन पाठ ॥

तुम्हरे द्वारे आन पड़ी हु शिरडी के महाराज,

साई बाबा हमारी रखो लाज लाज,

साई नजरियां करदो कर्म की सब के बन जाए काम,

तुम शिरडी के राजा तुम्हारा जग में ऊचा नाम,

नगर नगर में चर्चा तोरा नागर नागर तोरा नाम,

साई बाबा हमारी रखो लाज लाज,

तुम्हरे दर्श की मैं हु प्यासी आई तुम्हरे द्वार,

दिखला दो तुम अपने दर्शन हो जाए उपकार,

विनती सुन लो साई हमारी बिगड़े बना दो काम,

साई बाबा हमारी रखो लाज लाज,

मैं हु अबागन जग से हारी सब को दिया है प्यार,

तुमने सब पे किरपा की है मेरे बना दो भाग ,

तुम्हारी दासी मैं हु साई तुम हो मेरे महाराज,

साई बाबा हमारी रखो लाज लाज,

रूप कृष्ण का शान मुरारी तुम ही हो मेरे राम,

तुम पे जाऊ मैं बलिहारी साई सुभो श्याम,

आस लगाई तुम से मैंने जाए कहा मोहताज,

साई बाबा हमारी रखो लाज लाज,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।