घोडलिया ओ घोडलिया

गोपालजी बजाज
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

घोडलिया ओ..हो.. घोडलिया

घोडलिया तू ठुमक ठुमक रुणिचे जाइजे रे

रामाधणी ने लेकर बेगो बेगो आईज़े रे

घोडलिया ओ घोडलिया (२) !!१!!

म्हारा बापजीने कहीजे भगत याद करे हैं

थारी कृपा घनो धन्यवाद करे हैं

भगतारो संदेश बाबाने सुनाई जो रे

रामाधणी ने लेकर बेगो बेगो आईज़े रे

घोडलिया ओ घोडलिया (२) !!२!!

म्हारा बापजीने कहीजे थार खम्मा गावा हा

जम्मो जागरण करा हा साची ज्योत जगावा हा

भगतारो संदेश बाबाने सुनाई जो रे

रामाधणी ने लेकर बेगो बेगो आईज़े रे

घोडलिया ओ घोडलिया (२) !!३!!

म्हारा बापजीने कहीजे थारी आस लगाया हा

माका मनरा दर्पण मैं मिंदरियों सजाया हा

भगतारो संदेश बाबाने सुनाई जो रे

रामाधणी ने लेकर बेगो बेगो आईज़े रे

घोडलिया ओ घोडलिया (२) !!४!!

म्हारा बापजीने कहीजे भक्ति रंग छावे हैं

माका मनरों मोर्यो थारो हेलो गावे हैं

भगतारो संदेश बाबाने सुनाई जो रे

रामाधणी ने लेकर बेगो बेगो आईज़े रे

घोडलिया ओ घोडलिया (२) !!५!!

म्हारा बापजीने कहीजे थेतो लीलाधारी हो

कहे गोपालो जानो बाबा बात सारी हो

भगतारो संदेश बाबाने सुनाई जो रे

रामाधणी ने लेकर बेगो बेगो आईज़े रे

घोडलिया ओ घोडलिया (२) !!६!!

घोडलिया तू ठुमक ठुमक रुणिचे जाइजे रे

रामाधणी ने लेकर बेगो बेगो आईज़े रे

घोडलिया ओ घोडलिया (२) !!७!!

स्वर- गोपालजी बजाज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।