जग घुमिया बाबा जैसा ना कोई

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जय रामदेव आवातरी, लीले घोडेवाली अस्वरी

अजमल घर अवतारी, जय हो जय हो म्हारा बाबा थारी,

जग घुमिया थारे जैसा ना कोई, रुनिचेरा नाथ थारे जैसा ना कोई

व्दारेकारानाथ थारे जैसा ना कोई, जग घुमिया थारे जैसा ना कोई !! धृ !!

तुही तो है राम म्हारो.., तुही घनशाम रे...

तुही वाहेगुरू म्हारो.., तुही अल्लाह नाम रे..

थाने तो सभ ही.....

थाने तो सभ ही ध्यावे, हिंदू मुसलमान रे..

हिंदू कैवे बाबा थाने, पीर मुसलमान रे..

प्याला मक्का सु मगवाया तुही, पाच पीराने जीमाया तूह,

घोडो आकाशा उडाया तुही, पग कुकुरा माड्वया तुही,

सबपे दया रखाना...., जग घुमिया बाबा जैसा ना कोई !! १ !!

अमरकोटी राणी ही नेतल प्रकटीया, उनि का ही मीर माही रुनिचेरा धनिया

पगासू लचांग....

पगासू लचांग रनीनी पगाल्या गीराया, राणी नेतल थाने दिल मै बसाया

ब्याह रानीसे रचाया थे ही, राणी रुनीच्या मै लाया थे ही

मन प्रेम बसाया थे ही, दातार कहाया थे ही

सबपे दया रखाना...., जग घुमिया बाबा जैसा ना कोई !! २ !!

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।