सजा है भोले का दरबार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डमरू वाले तिरशूल वाले गले में बैठा नाग,

कितना प्यारा है शिंगार सजा है भोले का दरबार,

हम को भोले पे इतवार,

मेरे भोले भंडारी करे बस हां की सवारी,

करो किरपा हे अघोरी हाथ जोड़े दुखियारी,

मेरे मन में तू ही विराजे दर्शन देदो आज,

कितना प्यारा है दरबार सजा है भोले का दरबार ,

हम को भोले पे इतवार,

आँख तो खोलो भोले लाया हु भांग के गोले,

तुम्ही संसार के रक्षक पहनते हो मिरगा के चोले,

समज गये मेरे मन की ईशा पूरी करदो आस,

कितना प्यारा है दरबार सजा है भोले का दरबार ,

हम को भोले पे इतवार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।