नाचे मायूर बन कर मेरे श्याम झूम के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गाती तराने आज श्याम बहार झूम के,

नाचे मायूर बन कर मेरे श्याम झूम के

हुआ मैं कैद तेरी नजरो में श्याम आज,

समझ न पाया आज तलक नैनो का ये राज,

गाती दीवाने वन्वारे सब झूम झूम के,

नाचे मायूर बन कर मेरे श्याम झूम के,

सीखे कोई तुमसे खंजर चलना श्याम,

सब से बड़ा है कातिल लगे है ये इल्जाम ,

हस्ते हुए है आते गाते है झूम के,

नाचे मायूर बन कर मेरे श्याम झूम के,

आशिक बड़ा न तुम सा जो पेच लड़ावे ,

नित बदले रंग आपना तू प्रीत बड़ावे,

करता है सोदा प्रेम संग श्याम झूम के,

नाचे मायूर बन कर मेरे श्याम झूम के,

लिख लो मेरा भी नाम तरफदारो में,

महकू मैं भी सदा खाटू बाजारों में,

होगा दीदार श्याम सब नाचे झूम के,

नाचे मायूर बन कर मेरे श्याम झूम के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।