महेश वंदना - जय महेश बलिहारी

पलक मुछल
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

!! महेश वंदना !!

किस विधि वंदन करू तिहारो – ओढरदानी त्रिपुरारी

बलिहारी – बलिहारी – जय महेश बलिहारी !! धृ !!

नयन तीन उपवीत भुजंगा, शशि ललाट सोहे सिर गंगा

मुंड माल गल बिच विराजत, महिमा है भारी...

बलिहारी – बलिहारी – जय महेश बलिहारी !! १ !!

कर में डमरू त्रिशुल तिहारे, कटी में हर वाघंबर धारे

उमा सहित हीम शैल विराजत, शोभा है न्यारी.....

बलिहारी – बलिहारी – जय महेश बलिहारी !! २ !!

पल में प्रभु तुम प्रलयंकर, पर प्रभो सदय उभयंकर

ऋषी मुनि भेद न पाये तिहारो, हम तो है संसारी....

बलिहारी – बलिहारी – जय महेश बलिहारी !! ३ !!

अगम निगम तब भेद न जाने, ब्रम्हा विष्णु सदा शिव माने

देवो के ओ महादेव अब, रक्षा करो हमारी...

बलिहारी – बलिहारी – जय महेश बलिहारी !! ४ !!

किस विधि वंदन करू तिहारो – ओढरदानी त्रिपुरारी

बलिहारी – बलिहारी – जय महेश बलिहारी !! धृ !!

स्वर - पलक मुछल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।