आधी रात को मैया तेरी हूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आधी रात को मैया तेरी हूँ

आधी रात को मैया तेरी

कुण्डी ना खड़कता मैं

कोई और सहारा होता तो दरबार

तेरे न आता मैं.........

शेरावाली माँ मुझे तेरा ही भरोसा

ज्योता वाली माँ मुझे तेरा ही भरोसा

बार बार तेरे आगे माँ हूँ

बार बार तेरे आगे माँ

झोली न फैलता मैं

कोई और सहारा होता तो दरबार

तेरे न आता मैं........

घर घर घुमा दर दर भटका

कही न मिला ठिकाना माँ

कही न मिला ठिकाना माँ

तुझ सा कोई और न देखा

देखा सारा जमाना माँ

देखा सारा जमाना माँ…......

बार बार आने में मैया

थोड़ी लाज तो आती है

फिर ये सोच के आ जाता हूँ

खली ना लौटती है.........

तू हर बार ना देती माँ तो

क्यों उम्मीद लगता मैं

कोई और सहारा होता तो दरबार

तेरे न आता मैं...........

कौन है तेरे शिवा भवानी

जिसने जग को तारा है

जिसने तेरा ध्यम लगाया

उसका भाग्य सवार है.........

चंचल ना समझाता तो

ये बात समाझ न पता मैं …२

कोई और सहारा होता तो दरबार

आधी..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।