मोरिया रे मोरियाँ गणपति भप्पा मोरियाँ

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तू ही कष्ट निवारे मोरिया

तू ही भगतो को तारे मोरियाँ,

तू ही पार उतारे मोरियाँ,

मोरिया रे मोरियाँ गणपति भप्पा मोरियाँ,

युगो युगो से कहती दुनिया इक दंत धारी,

हर पल किरपा करता तेरा दर्शन मनोहारी,

मोरिया रे मोरियाँ गणपति भप्पा मोरियाँ,

केसर चन्दन तिलक लगाए मीठा मोदक भोग लगाये,

हम दीनन को पार लगाओ शम्भू सूत वारि,

तू ही राह दिखाए मोरियाँ,तू ही श्रिस्ति चलाये मोरियाँ तू ही सब को खिलाये मोरियाँ,

मोरिया रे मोरियाँ गणपति भप्पा मोरियाँ,

हे घनायक किरपा करदो दाता मेरी झोली भर दो,

जपु मैं तेरा नाम गजानन चार भुजा धारी,

तू ही कश्ती सवारे मोरेया तू ही बिगड़ी बनाये मोरियाँ तू ही जग को चलाये मोरियाँ,

मोरिया रे मोरियाँ गणपति भप्पा मोरियाँ,

सरवीण तोहे अर्ज लगाए हाथ जोड़ के तुझे भुलाये,

मनोकामना पूरी करदो जग के बलहारी,

तू ही रिद्धि के दाता मोरियाँ तू ही सीधी के दाता मोरियाँ तू ही भुधि के दाता मोरियाँ,

मोरिया रे मोरियाँ गणपति भप्पा मोरियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।