राधे राधे रटुगा आठो याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे राधे रटुगा आठो याम ब्रिज की गलियों में,

चाहे ढल जाए जीवन की शाम ब्रिज की गलियों में,

वृन्दावन को छोड़ कन्हियान दूर कभी न जावे,

जो गावे राधे राधे व के संग हो जावे,

मुरली कान्हा की बाजे आठो याम,

ब्रिज की गलियों में,

जिस की मर्जी के बिन जग में पता न हिल पावे,

धरती का चपा चपा जिस की रचना कहलावे,

उसे कहते है राधे को गुलाम,

ब्रिज की गलियों में,

जिस ने ब्रिज को देखा उसने बाते है ये मानी,

यमुना यम को दूर करे भव तारे राधे रानी,

कण कण में है चारो धाम,

ब्रिज की गलियों में,

सूरज ब्रिज के कण कण में बस राधे राधे गूंजे,

भूल के सारी दुनिया जो राधे चरणों को पूजे,

उन्हें मिल जाता है घनश्याम ब्रिज की गलियों में ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।