मैनु नाम दीं मस्ती चढ़ी चढ़ी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैनु नाम दीं मस्ती चढ़ी चढ़ी जी लख लख शुकराना मियां दा,

माँ किरपा किती बड़ी बड़ी,

जी लख शुक्राना मैया दा,

मैनु नाम दीं मस्ती चढ़ी चढ़ी जी लख लख शुकराना मियां दा,

है जिन्हे ते माँ दी किरपा जागे विच नची जांदे ने,

जो मिठड़े मेवे पाउंदे ने दाती दा शुक्र मनाउंदे ने,

है सोनी आ गई घड़ी घड़ी जी लख शुकराना मैया दा,

मैनु नाम दीं मस्ती चढ़ी चढ़ी जी लख लख शुकराना मियां दा,

भगतो माँ लारे नहीं लांदी ऐवे ही नीरा भूलेख है,

कोई आज लेंदा कोई कल लेंदा कर्मा दा मिलदा लेखा है,

कोई गल न रेहँदी अडी अडी जी लख शुकराना मैया दा,

मैनु नाम दीं मस्ती चढ़ी चढ़ी जी लख लख शुकराना मियां दा,

माँ बोल बोलके प्यारा दे माँ बदल देवे तकदीरा नु,

माँ ताले खोले किस्मत दे माँ कट दीं कई जंजीरा नु,

मेहरा दीं लावे चढ़ी चढ़ी जी लख शुक्राना मियां दा,

मैनु नाम दीं मस्ती चढ़ी चढ़ी जी लख लख शुकराना मियां दा,

मावा ता ठंडिया छावा ने माँ छावा करदी रेहँदी है,

सुलतान पूरी गुलशन लब ले माँ दिल तेरे विच रेहँदी है,

झोली सी खाली सी खनने दीं माँ झण्ड़ेया वाली भरी भरी,

मैनु नाम दीं मस्ती चढ़ी चढ़ी जी लख लख शुकराना मियां दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।