इच्छा यही मन में मैया मेरे जीवन में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इच्छा यही मन में मैया मेरे जीवन में,

कोई ऐसा भी पल आये कोई ऐसा भी पल आये,

जब मुझको गले से माँ तू अपने लगाने को

मूरत से निकल आये मूरत से निकल आये,

इच्छा यही मन में

जब जब सपनो में तेरा दीदार करता हु,

विनती यही तुमसे मैं माँ हर बार करता हु,

सपनो की तरह तेरा मिलना ये हक़ीत में,

इक वार बदल जाए इक बार बदल जाए,

इच्छा यही मन में मैया मेरे जीवन में,

आंखे तेरी मूरत को जब निहारा करती है,

जाने क्या हो जाता इन्हे जे झर झर बहती है,

नैना भी यही सोचे रोटा इन्हे देख कर,

श्याद तू पिगल जाए,

इच्छा यही मन में मैया मेरे जीवन में,

मुझपर तेरा इतवार है उपकार हो जाए,

ईशा मेरी जीवन की ये साकार हो जाए,

सोनू कहे फिर चाहे ये प्राण मेरे तन से,

उस पल ही निकल जाए,

इच्छा यही मन में मैया मेरे जीवन में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।