नचले श्याम धणी के द्वार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नचले श्याम धणी के द्वार,

तेरा होजा बेडा पार नचले श्याम धनि के द्वार,

तेरे श्याम के भकत है मतवाले यह झूमते है किस्मतवाले

मने देखे दिल्ली के लाले संग नाचते हरयाणा वाले,

पंजाबी भंगड़ा पाके नचले श्याम धणी के द्वार,

तेरा होजा बेडा पार नचले श्याम धनि के द्वार,

नचले श्याम धणी के द्वार,

मेरे श्याम के महिमा न्यारी है याहा नाच ते नर और नारी है,

भगतो पे किरपा भारी है ये सेठ बड़ा दातारि है,

चढ़ी श्याम नाम की मस्ती नचले श्याम धनि के द्वार,

तेरा होजा बेडा पार नचले श्याम धनि के द्वार,

नचले श्याम धणी के द्वार,

ढोल नगाड़ा दर पे भाजे भक्त झूम ते बाबा आ गये,

तन भगता शृंगार है साजे सोहना सोहन श्याम है लागे,

करे भूमर राजस्थानी चले नचले श्याम धणी के द्वार,

तेरा होजा बेडा पार नचले श्याम धनि के द्वार,

नचले श्याम धणी के द्वार,

बांग्ला गाडी नौकर देता रुपया पैसा डॉलर देता,

भक्तो के ये घर भर देता हरीश जब किरपा कर देता,

मोहन कोशिशक भगतो संग नचले श्याम धनि के द्वार,

तेरा होजा बेडा पार नचले श्याम धनि के द्वार,

नचले श्याम धणी के द्वार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।