आया नवराते का त्यौहार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आया नवराते का त्यौहार सब मिल माँ को रिजाये,

मैया नो दिन रहेगी अपने साथ सब मिल माँ को रिजाये,

चुनरी ओहडाये माँ की ज्योत जलाये,

करके उनका शृंगार,

सब मिल माँ को रिजाये,

आया नवराते का त्यौहार सब मिल माँ को रिजाये,

श्रिष्टि के कण कण में उनका ही वास है,

वो जग ही दाती है हम उनके दास है,

देती सहारा जब भी पुकारा,

वो जग की पालनहार,सब मिल माँ को रिजाये,

आया नवराते का त्यौहार सब मिल माँ को रिजाये,

अख़बर भी आया दर पे शीश झुकाया,

मैया को सोहने का छतर चढ़ाया,

दिल की वो जाने सब की वो माने उनकी लीला है अपरम्पार

सब मिल माँ को रिजाये,

आया नवराते का त्यौहार सब मिल माँ को रिजाये,

अष्ट भुजाओ से माँ दुष्टो को मारती,

शुंभ निशुभ्म महिषा सुर का असुरा का संगार की,

ऋषि मुनि देवी देवता भी पूजते माँ की लीला है अपरम्पार,

सब मिल माँ को रिजाये,

आया नवराते का त्यौहार सब मिल माँ को रिजाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।