जेहड़ा ना बोले ओह मियां दा चोर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज सुहानी राति है भगतो जगराते दी आई,

जय माता दी बोल बोल के रौनक खुभ लगाई,

सारे मिल के जय माँ बोलो लाके पूरा जोर,

जेहड़ा ना बोले ओह मियां दा चोर,

नूर इलाही मुख है माँ दा दुर्गर गाओ आया,

जिहने न करेया माँ दा दर्शन ओहने वक़्त गावया,

वक़्त गवाया हाथ नि आना फड़ लो नाम दी डोर,

जेहड़ा ना बोले ओह मियां दा चोर,

रेहमत भरेया दिन है माँ दा सारे मिल के मंगो,

डूब दिया नु तारे दाती भोरा भी न संगो,

एह घड़ियाँ हाथ नि आणि ला दो पूरा जोर,

जेहड़ा ना बोले ओह मियां दा चोर,

जीहदे उते माँ दी किरपा सदा सुख ही ओह माने,

जैल वाला लाड्डी भी दाती दे मने बहाने,

कोमल गोरी नु भी मैया नाम दी चढ़ गई लोर,

जेहड़ा ना बोले ओह मियां दा चोर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।