चाँद से सूंदर मुखड़ जिसका

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चाँद से सूंदर मुखड़ जिसका आंखे अमृत की प्याली,

वो तो कोई और नहीं है वो है माँ घांघण वाली,

चाँद से सूंदर मुखड़ जिसका आंखे अमृत की प्याली

नांद है जो कहते माँ का मुखड़ा चाँद के जैसा है,

हम ने चाँद को इस मुखड़े से नूर चुराते देखा है,

सूरज की किणरो ने मांगी माँ के हाथो से लाली,

चाँद से सूंदर मुखड़ जिसका आंखे अमृत की प्याली

क्यों देखे अम्बर को और क्या करना भाग बहारो का,

मैया की चुनरी में ही है डेरा चाँद सितारों का,

ऐसा कोई फूल न जिस से माँ का गजरा हो खाली,

चाँद से सूंदर मुखड़ जिसका आंखे अमृत की प्याली

स्वर्ग वो देखे सोनू जिनके दिल में इसकी चाहत है ,

अपना स्वर्ग तो धंधन वाली मैया तेरी चौकठ है,

स्वर्ग से ज्यादा खुशियां हमने माँ के चरणों में पाई,

चाँद से सूंदर मुखड़ जिसका आंखे अमृत की प्याली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।