सूरत की बलिहारी मेरे आंबे भवानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सूरत की बलिहारी मेरे आंबे भवानी,

पहले पहर मैया ऐसे लगत है,

जैसे कन्याँ कुमारी मेरी आंबे भवानी,

दूसरे पहर मियां ऐसे लगत है जैसे सुहागन नारी,

मेरी आंबे भवानी,

सूरत की बलिहारी मेरे आंबे भवानी,

तीसरे पहर मैया ऐसी लगत है जैसे दुल्हन प्यारी,

मेरी आंबे भवानी,

सूरत की बलिहारी मेरे आंबे भवानी,

चौथे पहर मैया ऐसी लगत है जैसे बूढी मेहतारी,

मेरी आंबे भवानी,

सूरत की बलिहारी मेरे आंबे भवानी,

पचवें पहर मियां ऐसी लगत है जैसे शेरावाली,

मेरी आंबे भवानी,

सूरत की बलिहारी मेरे आंबे भवानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।