मेरे राम लला की जग में उँची शान चाहिए

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मैं हू हनुमान और ये देश मेरा राम है

चीर के देखलो छाती मेरी दिल में हिन्दुस्तान है

भगवा रंग हम हिंदुत्व की शान है

सारे जगत में अपनी अलग पहचान चाहिए

मेरे राम लला की जग में उँची शान चाहिए

देख के चौड़ी छाती जिसकी दुश्मन थर थर कापे

मोदी जैसा कलियुग में हनुमान

श्री राम लला की जग में उँची शान चाहिए

रावण की लंका में घुस के लंका राख बनादि

राम नाम का भगवा परचम गली गली लहरा दे

दुश्मन समझे जिस भासा को उससे वही समझा दे

राम राज्य वाला ही हिन्दुस्तान चाहिए

श्री राम लला की जग में उँची शान चाहिए

बनके चोकीदार देश की करे जो पहरे डारी

देखी नही काई सालो में मैने आएसी सेवदारी

सब कुच्छ सहन है देश को लेकिन सहन नही गद्दारी

आँधी नही दिलो में अब तूफान चाहिए

श्री राम लला की जग में उँची शान चाहिए

लकी अनिल कहे फिर से राम लाला घर आए

सरयू मैया की लहरो ने मंगल गीत सुनाए

पवन पुत्रा हनुमान आज फिर काम राम के आए

मेरे राम लला को जानम स्थान चाहिए

श्री राम लला की जग में उँची शान चाहिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।