अब दया करो बजरंगबलि

लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

अब दया करो, बजरंगबली,

मेरे कष्ट हरो बजरंगबली ।

मैं निर्बल शरण तिहारी हूँ,

कुछ ध्यान धरो बजरंगबली, बजरंगबली॥

अब दया करो...

तुम काज संवारा करते हो,

दुखियों के दुखड़े हरते हो ।

माता अंजनी के जाए हो,

सिया राम के मन में समाये हो ।

सालासर घणी कहाते हो, संकट में दौड़े आते हो ।

अब दया करो...

सूरज को निगल गए समझ के फल,

सोने की लंका दी राख में बदल ।

जब प्राण लखन के थे संकट मे,

संजीवन लाये झटपट में ।

दुष्टों का सदा संघार किया,

भक्तो का बेडा पार किया ।

अब दया करो...

हम दुःख विपदा के मारे है,

इस जूठे जगत से हारे हैं ।

उलझन ही उलझन पग पग पर,

रास्ता अब कोई आये न नज़र ।

है ‘कमल सरन’ कमजोर पड़ा,

‘लक्खा’ ले फरियाद है दर पे खड़ा ॥

अब दया करो...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।