श्री गुरुबर को जिसने पूजा

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॥ पावन पाठ ॥

श्री गुरुबर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ ,

इस जीवन मे उनके दुख का निश्चय ही संघार हुआ ,

ऐसे गुरुवर की पूजा करुं,

ध्यान चरणों मे उनके धरू

हम सब है गरूदेव शरण मे ,

हम सब है गुरदेव शरण मे

नाम ऊँचा है सबसे गुरदेव का,

वंदना करते ही सबका है संकट मिटा,

इसकी पूजा से वरदान पातें हैं सब,

भक्ति का दान पातें हैं सब,

सभी शिष्य मंडल पर प्यारे गुरुवर का उपकार हुआ,

जो भी जाए गुरु शरण मे उसका बेड़ा पार हुआ,

आओ भक्तो चलो मिलकर गुरुवर के द्वार,

अपनी सोई हुई तू है, किश्मत सँवार,

सौप जीवन की डोरी, तू गुरुवर के हाथ,

उनके चरणों मे रखदे तू माथ

जीवन से अंधियारा तेरे, पल में है मिट जाएगा.

कर ले गुरु की सेवा प्यारे भव सागर तर जाएगा

स्वरचना:-भजन गायक

अभिषेक चौरसिया 9098001541

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।