कुछ भी बन बस कायर मत बन

पंडित नरेंद्र शर्मा
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॥ पावन पाठ ॥

कुछ भी बन , बस कायर मत बन !

ठोकर मार,पटक मत माथा..

तेरी राह रोकते पाहन !

कुछ भी बन , बस कायर मत बन !

ले- देकर जीना क्या जीना ?

कब तक गम के आंसू पीना ?

मानवता ने सींचा तुझको ...

बहा युगों तक खून पसीना !

कुछ न करेगा ? किया करेगा ..

रे मनुष्य -- बस कातर क्रंदन ?

कुछ भी बन , बस कायर मत बन !

"युद्ध देहि " कहे जब पामर ..

दे न दुहाई पीठ फेर कर !

या तो जीत प्रीति के बल पर..

या तेरा पथ चूमे तस्कर !

'प्रतिहिन्सा भी दुर्बलता' है ..

पर कायरता अधिक अपावन !

कुछ भी बन , बस कायर मत बन !

तेरी रक्षा का न मोल है ..

पर तेरा मानव अमोल है !

यह मिटता है,वह बनता है ..

यही सत्य की सही तोल है !

अर्पण कर सर्वस्व मनुज को..

कर न दुष्ट को आत्म समर्पण !

कुछ भी बन , बस कायर मत बन !

गायिका : माधुरी मिश्रा

संगीत : माधुरी मिश्रा

गीतकार : पंडित नरेंद्र शर्मा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।