बोले नंदलाला सुनो यशोमती मैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बोले नंदलाला सुनो यशोमती मैया,

मेरी बढ़ती उमर, राधा बड़ी सुन्दर,

मेरो ब्याह कर दे, ब्याह कर दे,

राधा रानी गोरी है, तू कारो है कन्हैया,

वांकी बड़ी है उमर, हंसी होसी घर घर,

बेटा ना कर दे, ना कर दे,

बोले नन्दलाला सुनो यशोमती मैया।।

तर्ज – कौन दिशा में लेके।

बड़ी सी उमर की आ सी दुल्हनिया,

करसी ज्यादा काम हो,

घर को धंधो छोड़ के मैया,

करिए तू आराम हो,

करसी रसोई वा, रहिये तू सोई,

करसी रसोई वा, रहिये तू सोई,

मैया सुबह और शाम हो,

ब्याह ना करे तो,

ना चराऊ तेरी गैया,

मेरी बढ़ती उमर, राधा बड़ी सुन्दर,

मेरो ब्याह कर दे, ब्याह कर दे,

बोले नन्दलाला सुनो यशोमती मैया।।

कैसी जादूगरनी है राधा,

कर गई जादू टोनो रे,

राधे राधे रटतो डोले,

मेरो श्याम सलोनो रे,

झाड़ फूंक करवानो पडसी,

झाड़ फूंक करवानो पडसी,

ढूंढो पंडित श्याणो रे,

जादूगरनी जादू कर गई,

जादूगरनी जादू कर गई,

उतरेगा कईया,

मेरी बढ़ती उमर, राधा बड़ी सुन्दर,

मेरो ब्याह कर दे, ब्याह कर दे,

बोले नन्दलाला सुनो यशोमती मैया।।

मैं तो मात परायो जायो,

वासुदेव जी को बेटो रे,

सांवरिया तने खारो लागे,

बलदाऊ लागे मिठो रे,

सांची बोलूं मात यशोदा,

सांची बोलूं मात यशोदा,

मैं ना कभी बोलूं झूठो रे,

डोलूं ना निठल्लो,

मैं कमाऊंगो रुपइयो,

मेरी बढ़ती उमर, राधा बड़ी सुन्दर,

मेरो ब्याह कर दे, ब्याह कर दे,

बोले नन्दलाला सुनो यशोमती मैया।।

कृष्ण की बाता सुनकर,

मैया नीर भर लाई हो,

बलदाऊ से बढ़कर मेरो,

तू है कृष्ण कन्हाई हो,

तेरी सेवा में युग बीते,

तेरी सेवा में युग बीते,

सोच के जग में आई हो,

कहे रे ‘नरेश’ कृष्ण माया का रचैया,

कहे रे ‘नरेश’ कृष्ण माया का रचैया,

मेरी बढ़ती उमर, राधा बड़ी सुन्दर,

मेरो ब्याह कर दे, ब्याह कर दे,

बोले नन्दलाला सुनो यशोमती मैया।।

बोले नंदलाला सुनो यशोमती मैया,

मेरी बढ़ती उमर, राधा बड़ी सुन्दर,

मेरो ब्याह कर दे, ब्याह कर दे,

राधा रानी गोरी है, तू कारो है कन्हैया,

वांकी बड़ी है उमर, हंसी होसी घर घर,

बेटा ना कर दे, ना कर दे,

बोले नन्दलाला सुनो यशोमती मैया।।

प्रेषक -

दिनेश स्वामी

राधा कृष्ण नगर कॉलोनी

सुजानगढ़ जिला चूरु राजस्थान

मोबाइल नंबर 9413724675

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।