जो भी माँ की भक्ति का दीवाना होता है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जो भी माँ की भक्ति दीवाना होता है

वो हमेशा हर ग़म से बेगाना होता है

सुबह-शाम श्रद्धा से जो ले माँ का नाम

पल में ही बनते उसके बिगड़े हुए काम

जो न पूजे माँ को वो अनजाना होता है

वो हमेशा हर ग़म से बेगाना होता है।

जो भी माँ की भक्ति का दीवाना होता है

वो हमेशा हर ग़म से बेगाना होता है।

हरदम भला ही सबका करती है ये

भंडार भक्त जनों के भरती है ये

निर्धन भी माँ के फल से धनवाला होता है,

वो हमेशा हर ग़म से बेगाना होता है।

जो भी माँ की भक्ति का दीवाना होता है

वो हमेशा हर ग़म से बेगाना होता है ।

है और जग में भला माँ से बड़ा कौन

मूक भी दया से माँ की कैसे रहे मौन

माँ की कृपा से जो जाना पहचाना होता है,

वो हमेशा हर ग़म से बेगाना होता है ।

जो भी माँ की भक्ति का दीवाना होता है,

वो हमेशा हर ग़म से बेगाना होता है

भजनकार - मनोज कुमार खरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।