उलाम्बे सारे दूर हो गये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झंडे वाली ने मेहर बरसाई उलाम्बे सारे दूर हो गये,

माँ ने खुशिया दी मौज ऐसी लाइ उलाम्बे सारे दूर हो गये,

पूरा किता झंडे वाली माँ ने हर सवाल है,

भर दिति झोली साडी सूखा नाल है,

गल बिगड़ी है माँ ने बनाई उलाम्बे सारे दूर हो गये

झंडेवाली नाल साढ़े रेहँदी दिन रेन ऐ,

हर के बेचैनी साड़ी दिता सुख चैन ऐ,

याद दुखा दी दिल को बुलाई,

उलाम्बे सारे दूर हो गये

झंडेवाली दी सागर वेल ऐसी होइ है,

मन विच रहा न सिकवा न कोई ऐ,

दात मन चाहि मियां कोलो पाई,

उलाम्बे सारे दूर हो गये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।