मेरे नानका मेरे नानका

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे नानका मेरे नानका,

धन गुरु नानक पीर पैगम्बर,

सारिया गुरुआ तेरा पहला नंबर,

धन गुरु नानक पीर पैगम्बर,

वसदा तू हर शेह दे अंदर,

तेरे बिना कख हां मैं तू है ते लख हां मैं,

तेरे बिना लंगदे न पार समंदर,

रंग दे मैनु तू अपने नाम दे अंदर,

मेरे नानका मेरे नानका,

नानक नाम चाढ़ी दी कला तेरे भाने सरबत दा भला,

नाम निरंजन नीर नरयाण रसना सिमरत पाप पिलायें,

तू ही मेरा मित्र प्यारा तू ही परमेश्वर प्यारा,

तू ही दुःख हर्ता सुख आस है,

तू ही सब दिल दियां जाने तू ही हर दर्द पहचाने,

बिन बोलीअ सब जान दा,

तू ही गोविन्द तू ही मुकंदे तू किरपला तू ही बक्संद है

तू मेरे मालका जग दिया पालका,

तू जो करे सो होये मेरे मालका,

रंग जावा मैं तेरे नाम च नानका,

मेरे नानका मेरे नानका,

जिन जपेया सो तरेया जिन भुलैया सो डुबेया,

ना उमरैना धागे जाए जिनके राम बसे मन माहि

दुःख भी तो जाने कोई,

तू जो करे सो होये मेरे सच्चे पातशाह नानका,

दोहा यहां तक वाली गए आते रखवाली सारे जिह्ना नु तू पालता ,

तू ही भरम ग्यानी तू ही परमेश्वर,

तू ही अंत है तू ही जागेश्वर,

तू ही अरूप है तू ही अनूप है तू ही सर्व कला भरपूर विच,

रंग दे मैनु आपने नाम दे नूर विच,

मेरे नानका मेरे नानका,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।