शिव की रात शिव रात्रि

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव की रात आई शिव रात आई शिव की रात शिव रात्रि,

धरती झूमे अम्बर झूमे झूमे दिन और रात री,

शिव की रात आई शिव रात आई शिव की रात शिव रात्रि,

मस्त जटों में गंगा नाचे डम डम डमरू बाजे रे,

सारी सृष्टि में है चर्चा शिव का डंका बाजे रे,

देव घणो संग नंदी नाचे आई ये शुभ रात्रि,

शिव की रात आई शिव रात आई शिव की रात शिव रात्रि,

पान चढ़ा के ऐसे झूमे देखो शिव के दीवाने,

कावड़ियों के डोले शिव के रंग में रंगे मस्ताने,

शिव की महक में ऐसे मेहके मेहके दिन रात्रि,

शिव की रात आई शिव रात आई शिव की रात शिव रात्रि,

जीव जंतु और योगी बोहगी शिव का नाम उचारे रे,

शिव का तांडव देख रहे है धरती चाँद सितारे रे,

भरमा विष्णु आ गये बन के बन कैलाश के यात्री,

शिव की रात आई शिव रात आई शिव की रात शिव रात्रि,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।