तुम ही बता दो मेरे साई

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॥ पावन पाठ ॥

कैसे लिखू तेरी महिमा की गाथा,

तुम ही बता दो मेरे साई,

सब में तेरा रंग समाया,

सब में साई तेरा ही रूप,

चाहे धरा पाताल गगन हो,

भोर हो रात हो छाव हो धुप,

सृष्टि की हर रचना में है तेरे रूप की ही परछाई,

तुम ही बता दो मेरे साई,

मन अंतर में जब जब जांकू,

तेरी ही सूरत दिख जाती है,

मेरी नजर और भी जाए तेरी किरपा मिल जाती है,

अंदर भी तुम तुम ही बाहर चारो तरफ तेरी करुणाई,

तुम ही बता दो मेरे साई,

शब्दों में गाये नहीं जाए,

और कलम ये हार गई है,

तेरी महिमा कह नहीं पाउ कोशिश सब बेकार रही है,

अपनी महिमा आप ही जानो हम क्या जाने ये गहराई,

तुम ही बता दो मेरे साई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।