माये साहनु तेरा ही प्यार चाहिदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माये साहनु तेरा ही प्यार चाहिदा,

प्यार चाहिदा विशुरमार चाहिदा,

घट वध नहियो इक सार चाहिदा लगा तार चाहिदा,

माये साहनु तेरा ही प्यार चाहिदा,

कहन्दे नहियो चन कोई वेहड़े सादे डंगदे,

चीज कोई महंगी तेरे कोलो नहियो मंगदे,

जो कीमत तो परे ओह दुलार चाहिदा,

दुलार चाहिदा विशुरमार चाहिदा,

घट वध नहियो इक सार चाहिदा लगा तार चाहिदा,

माये साहनु तेरा ही प्यार चाहिदा,

ममता दा तेरे कॉल भरया खजाना है,

झोलिया भरा के ऐसी लेके आज जाना है,

जिहनि वार आइये ओहनी वार चाहिदा,

ओहनी वार चाहिदा,विशुरमार चाहिदा,

घट वध नहियो इक सार चाहिदा लगा तार चाहिदा,

माये साहनु तेरा ही प्यार चाहिदा,

तू देदे प्यार ऐसी सजदा देवा गे,

सागर वांगु जीवन तेरे कर गुजार देवा गे ,

रहना दर अपना बी हार चाहिदा,

बी हार चाहिदा विशुरमार चाहिदा,

घट वध नहियो इक सार चाहिदा लगा तार चाहिदा,

माये साहनु तेरा ही प्यार चाहिदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।