मेरे मेहरा वाले सैयां

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॥ पावन पाठ ॥

तू मेहरा करतिया नि मेरे मेहरा वाले सैयां,

सारा जग छड़ेया मैं इक आसा तेरे ते लाइयाँ,

तू मेहरा करतिया नि मेरे मेहरा वाले सैयां,

धरती कदे अम्बर विच सैयां बस तू ही तू समाया है,

गीता कुरआन भावे बाइबिल गुरुग्रंथ साहिब फ़रमाया है,

तनु अखि किसे ने देख्या नि तेरी दीद लई अखिया भर ाइयाँ,

तू मेहरा करतिया नि मेरे मेहरा वाले सैयां,

एथे सब कर्म दा मिलदा है जो जैसा करदा पा लेंदा,

ओह कदे न माडे कर्म करे जो दातिया तेरा ना लेंदा,

ओह परदे सब दे कज लेंदा तेरे नाम प्रीता पाइयाँ,

तू मेहरा करतिया नि मेरे मेहरा वाले सैयां,

इस नब्ज दा की है रुक जानी साहा दी कहानी मूक जानी,

चंगे नाल चंगा हुँदा है एह केहन्दी सतगुरु दी वाणी,

तेरे चरना विच माहि हीट गया गला दिल दियाँ आज सुनाइयाँ,

तू मेहरा करतिया नि मेरे मेहरा वाले सैयां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।