तेरा साथ ना छूटे सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवरियां चाहे जग रूठे छूटे कभी न तेरा साथ,

जग के सफर की सारी डगर में थामे रहो मेरा हाथ,

छूटे कभी न तेरा साथ...

जग के रिश्तो के बनते है रोज नये अफ़साने,

तेरी मेरी प्रीत पुरानी मैं जानू तू जाने,

जग वाले ये क्या समजे गे तेरी मेरी बात,

छूटे कभी न तेरा साथ...

तन मन धड़कन सब तेरी है मेरा कण कण तेरा,

इक तेरी रहे छवि निरन्तर दिल ये दर्पण मेरा,

आँखे मेरी लव्ज वहाये जाहिर है जज्बात,

छूटे कभी न तेरा साथ,

अगर पूछे कोई मुझसे ये चाहत तेरी कितनी है,

मैं बोलूगा साथ है तेरा हरसत बस इतनी है,

निर्मल चाहे तेरी किरपा की उम्र तक सौगात,

छूटे कभी न तेरा साथ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।