सुन गोरजा बरात आ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुन गोरजा बरात आ गईं भोले नाथ दी बारात आ गईं,

लेके मस्त मलंगा नु भुत प्रेत भंगा नु सारी दुनिया दे नाल आ गईं,

भोले नाथ दी बारात आ गईं,

चेहरा शिव दा देख के आया नागा दा विच पेहरा,

डमरू बजावे भुत नचावे लीडा ना पाया कोई गेहना,

बैल दी ओ करे सवारी पिंडे ते बसम नि गहरा,

ओहदे लम्बे लम्बे बाल गोरा लगदा बेहाल किते धोखा ता नि खा गईं,

भोले नाथ दी बारात आ गईं,

घर दा रासन खा गये ने सारा दो छोटे मोटे बालक,

तेरी पिता दी इज्जत दा ता हूँ भगवान ही मालक,

शूकर शनिशर नाम ओहना दे शिव ओहना दा पालक,

लभदे भूखे नंगे ओह करदे फिरदे दंगे ओ गोरा संकट दी घडी आ गईं,

भोले नाथ दी बारात आ गईं,

तू मेहला दी रानी गोरा शिव किथों दा रेहन वाला,

भूखी प्यासी रखे गा तनु लगदा नहीं दिल वाला,

लगदा है तू जान दी सब मुँह नु ला लिया ताला,

लक्की राजा बम बम बोल .एथे गला ने सब गोल,

गोरा माता दी पसंग आ गईं,

भोले नाथ दी बारात आ गईं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।