कदम कदम बढाए जा ख़ुशी के गीत गाये जा

पंडित वंशीधर शुक्ला
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॥ पावन पाठ ॥

कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा

ये जिन्दगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाये जा

तू शेर-ए-हिन्द आगे बढ़, मरने से तू कभी ना डर

उड़ा के दुश्मनों का सर, जोश-ए-वतन बढ़ाये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा...

तेरी हिम्मत बढ़ती रहे, खुदा तेरी सुनता रहे

जो सामने तेरे अड़े, तो ख़ाक में मिलाये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा...

चलो दिल्ली पुकार के, गम-ए-निशां सम्भाल के

लाल किले पे गाड़ के, लहराये जा, लहराये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा...

कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा

ये जिन्दगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाये जा

गीतकार - पंडित वंशीधर शुक्ला

संगीत रचना - राम सिंह ठाकुरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।