पगड़ी संभाल जट्टा

समीर
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॥ पावन पाठ ॥

तेरा लुट ना जाए माल ओए,

ओ जट्टा पगड़ी संभाल ओए,

पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल ओए

तेरा लुट ना जाए माल जट्टा पगड़ी संभाल ओए,

तोड़ गुलामी की जंजीरें,बदल दे तू अपनी तक़दीरें,

पड़ जा ऐसा इनके पल्ले,कर दे इनकी बल्ले-बल्ले,

आसमानो को भी वो झुकाये झुकाये,

यारों जो कभी भी हिम्मत ना हारे,

आदमी यहां पे जो चाहे जो चाहे,

यारों तो जमीन पे लाये सितारें,

बन्दा किसने हवा को,वक्त को किसने देखा,

म्हणत से ही बदलेगी तेरी हाथों की रेखा,

तेरा लुट ना जाए माल जट्टा पगड़ी संभाल ओए,

आज हम करेंगे ये वादा ये वादा जट्टा,

आज हम करेंगे ये वादा,

बेड़ियों को मिल के मिटाना मिटाना जट्टा,

है यही अब अपना इरादा,

फौलादी है बाहें तेरी,पत्थर का है सीना,

करदे करदे इन गोरों का अब तो मुश्किल जीना,

तेरा लुट ना जाए माल जट्टा पगड़ी संभाल ओए,

तोड़ गुलामी की जंजीरें,बदल दे तू अपनी तक़दीरें,

पड़ जा ऐसा इनके पल्ले,कर दे इनकी बल्ले-बल्ले,

फिल्म - The Legend of Bhagat Singh

गीतकार - समीर

गायक - सुखविंदर सिंह

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।