बेहन नानकी पकावे रोटियां

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॥ पावन पाठ ॥

ख्याल कदो वीर दा रोटी तवीं ते पा के ,

चौहदी आ के वीर बैठ जे मुड़े निकडा पीड़ी ते आके,

आके भावे झट मूड जे पर आउंदा ता देर न लावे,

बेहन नानकी पकावे रोटियां,

निका वीर बैठा दही नाल खावे,

दोहा दा प्यार वेख के रूप रोटियां नु चढ़ दूना जावे,

बेहन नानकी पकावे रोटियां,

निका वीर बैठा दही नाल खावे,

सोहने ते सुनखे थाल नु भेन पुंज के पल्ले नाल हस पाई,

वीरा तेरे आऊं नाल वे साडी नगरी नैना दी वस् पाई,

ओहदो दिल डुंडा दुभदा जदो का न भी वनेरे कुरळावे,

बेहन नानकी पकावे रोटियां,

निका वीर बैठा दही नाल खावे,

आँख जदो खोली बेहन ने वीर सजेया पीड़ी ते बैठा,

नीमा नीमा हसदा पेया हथ जोड़ के बहन नु बैठा,

कहंदा बीबी पा दे फुल्का भूख प्यार दी चली न जावे,

बेहन नानकी पकावे रोटियां,

निका वीर बैठा दही नाल खावे,

छना वड़ा गोके दूध दा बेहन काड्णी चो भर के ले आई,

मीठा मुँह करौं वास्ते नाले दूध दियां डलियाँ ले आई,

लाड न लड़ाउंदी थक दी वीत रूस न किते रब जावे,

बेहन नानकी पकावे रोटियां,

निका वीर बैठा दही नाल खावे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।