जदो निकली कैलाशो गज भज के बरात मेरे भोले दी,

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इकठे हो गये भगत ने सारे भजे ढोल की शंख नगाड़े,

नच्दे भगत भोले दे प्यारे लाउंदे ओह जयकारे,

जदो निकली कैलाशो गज भज के बरात मेरे भोले दी,

हसदियाँ नाले ताने देवन गोरा नु ओह्दी सखियाँ,

भुत प्रेता वाल नाल सोच तू लाइयाँ अखियां,

करदियां टिचरा वेख के ओह पुछाक मेरे भोले दी,

जदो निकली कैलाशो गज भज के बरात मेरे भोले दी,

ना घोडा न हाथी आया बेल दी करके सवारी,

मल के बसम भोले ने देह अपनी असवारी,

गल लटके नागा दी माला,

डमरू हथ मेरे भोले दे,

जदो निकली कैलाशो गज भज के बरात मेरे भोले दी,

कोई ढोलक ते कोई छैना ते कोई शंख बजावे,

लिखे सुभाश ते भजन मेहता गा गा भंगड़े भावे,

जो कोले दी माँ दे सब सौगात मेरे भोले दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।