सँवारे संजन की मैं बनु गी दुलहनियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सँवारे संजन की मैं बनु गी दुलहनियाँ,

बनु गी सजानियाँ मैं बनुगी दुल्हनियां,

सँवारे संजन की मैं बनु गी दुलहनियाँ,

सँवारे के नाम की मैं मेहँदी रचाऊ गी,

वो मेरे होंगे मैं उनकी हो जाउंगी,

श्याम रंग की मैं तो ओहड़ू गी ओहढणियां

सँवारे संजन की मैं बनु गी दुलहनियाँ,

शयाम भगत मेरे बनेगे बराती,

बाजे गी शहनाई आये घोड़े और हठी,

पहली बारी ऐसी जोगी देखे गी ये दुनिया,

सँवारे संजन की मैं बनु गी दुलहनियाँ,

बन के सुहागन ब्रिज मैं जाउंगी सँवारे की सेवा में चरम मैं बिताऊ गी,

श्याम तेरी धुन में मैं बनी रे जोगणियां,

सँवारे संजन की मैं बनु गी दुलहनियाँ,

फेरे होंगे सँवारे से जन्म जन्म के,

बनवारी रात दिन राहु बन ठन के,

देख देख जले गी ये सौतन मुरलियाँ,

सँवारे संजन की मैं बनु गी दुलहनियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।