बांह फड़ के साहनु भी भने ला जा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बांह फड़ के साहनु भी भने ला जा आसा भी माये पार लंगना,

दुखा ते समुंदरा च बेड़ी पई आ डोल दी,

आजा माँ आजा तेरी राह पाई आ टोल दी,

कर किरपा ते सीधे रहे पा जा,

आसा भी माये पार लंगना,

तेरे बिना दिसदा सहारा साहनु होर न,

तेरे सिवा माये सड़ा चले किते जोर न,

सड़ा टूटा जंदा होंसला वधा जा,

आसा भी माये पार लंगना,

आखिरी ने पल माये आखिरी हिसावा ने,

आजा बंद हों नु एह दास दी निगाहावा ने,

वेला आखरी है दर्श दिखा जा,

आसा भी माये पार लंगना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।